Source: ALLEN Sanchar ( BHRAMAN Episodes )

Kota BHRAMAN Video :

Third Episode of BHRAMAN.
In this episode you will find breathtaking places of Beautiful Kota City :-
Badoli Temple Kota and Kansua Dham Kota

About Badoli Temple

( Source : wikipedia )

The Badoli Temples Complex, also known as the Badoli temples, is located in Baroli village in Rawatbhata town in Chittorgarh district in Rajasthan, India. The complex of eight temples is situated within a walled enclosure; an additional temple is about 1 kilometre (0.62 mi) away. They are built in the Pratihara style of temple architecture dated to the tenth century A.D. All nine temples are under the control of the Archaeological Survey of India for conservation and protection. A well known art critic characterized “the creations of Badoli as the most perfect of their age that he had encountered within that part of the country and, in their own peculiar style.”

The 10th-century Baroli Temples are of great architectural interest, consisting of temple structures built in the Gurjara-Pratihara architectural style, with exquisitely carved stonework. They are in differing stages of upkeep, with some in a semi-ruined state.

There are 8 major temples in Baroli and a ninth about one kilometre away. Four temples are dedicated to Shiva (including Ghateshwara Mahadeva Temple), two to Durga and one each to Shiva-Trimurti, Vishnu and Ganesha.

The Nataraja (Natesha) images carved in these temples are similar to those seen at Upramala. The sculpture has 16 arms and its headdress is matted. There is a large diadem carved at the centre top of the skull, which is “garnished with beaded swags.” The facial features are very fine, with high arched brows and full mouth.

About Kansua Dham Kota

Source: (rajasthanpatrika.patrika.com) for Hindi Article-

यूं तो कोटा की पहचान कोचिंग नगरी के तौर पर होती है, लेकिन महर्षि विश्वामित्र और इंद्र की अप्सरा मेनका के मिलन से जन्मी उनकी पुत्री शकुंतला से भी इस शहर का गहरा रिश्ता रहा है। विश्वामित्र के अभिन्न मित्र और सप्तऋषियों में से एक महर्षि कण्व जिन्हें ऋषि कर्णव के नाम से भी जाना जाता है, ने शकुंतला का पालन-पोषण किया था। आर्याव्रत नरेश दुष्यंत से मिलन के बाद शकुंतला ने ऋषि कण्व के आश्रम में भरत नाम के पुत्र को जन्म दिया। जिनके नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा ।

भगवान भोलेनाथ के परम भक्त महर्षि कण्व ने आर्याव्रत में चार आश्रमों की स्थापना की थी। जिसमें से एक कोटा के कंसुआ गांव में स्थापित है। उन्होंने आश्रम में ही अपने आराध्य देव भगवान शिव और उनके परिवार के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा भी की। महर्षि कण्व की भक्ति से प्रसन्न भगवान भोलेनाथ ने उन्हें वरदान दिया कि अपने और जगत के कल्याण की इच्छा से आश्रम में आने वाले लोगों को कुछ भी मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मेरी प्रतिमा के समक्ष उसके मन में जैसे ही कोई इच्छा आएगी मैं तत्काल पूरी करूंगा।

कर्णेश्वर धाम दुनिया का यह ऐसा इकलौता मंदिर है जहां भगवान शिव के साथ उनका पूरा परिवार विराजता है। यहां भगवान शिव के साथ माता पार्वती और मां गंगा ही नहीं उनके दोनों पुत्र भगवान गणेश और कार्तिकेय के साथ-साथ पुत्री अशोकासुंदरी भी विराजमान हैं। आश्रम में शिवगण, नंदी और भैरव भी विराजमान हैं।

इस मंदिर की दूसरी सबसे बड़ी खासियत यह है कि भगवान शिव अपने भक्तों को माता पार्वती जितना स्नेह देते हैं। यहां भगवान शिव माता पार्वती के साथ नंदी पर विराजमान हैं। चंवर ढुला रही मां पार्वती भगवान शिव को निहार रही हैं और प्रेम के वशीभूत भगवान भी उन्हें देख रहे हैं, लेकिन जैसे ही कोई भक्त उनके चरणों में ढोक देता है उस पर भी उनकी उतनी ही दृष्टि रहती है। इसके साथ ही मंदिर में तीन चतुर्भुजी शिवलिंग भी स्थापित हैं जो अपने-आप में अनूठे हैं।

कर्णेश्वर धाम में मौर्य शासकों की अगाध श्रद्धा थी। आश्रम की हालत जीर्ण-शीर्ण होने पर राजा धवल ने 738 ईस्वी में अपने सेनापति शिवगण को मंदिर का जीर्णोद्धार कराने का आदेश दिया। काम पूरा होने पर शिवगण ने मंदिर की दीवार पर दो शिलालेख भी लगवाए। प्राकृत और आदिसंस्कृत भाषा में लिखे इन शिलालेखों में मंदिर की महत्ता का उल्लेख किया गया है।

मंदिर की स्थापना इस तरह की गई है कि सूर्य जब भी उत्तरायण और दक्षिणायन होता है दोनों बार एक-एक महीने के लिए उनकी पहली किरण सीधे मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव की प्रतिमा के चरणों में पड़ती है। मान्यता है कि मंदिर के प्रांगण में स्थापित जल कुंड में स्नान करने से समस्त कष्टों का अंत हो जाता है।

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