Source: Amar Ujala (25-Oct-2018)

Meet Thamim, Burqa-Clad Football Coach Who Is Training Girls In Chennai For The Nationals

 

 

चेन्नई की 35 वर्षीय तमीमुन्निसा जब्बार ऐसी ही महिला हैं जो लड़कियों को फुटबॉल सिखाती हैं। उन्हें प्यार से लोग तमीम भी बुलाते हैं।

चेन्नई में मुस्लिम महिला एसोसिएशन स्कूल की टीम में फॉर्वर्ड खेलने वाली 14 वर्षीय आबिदा को भी तमीम ट्रेनिंग देती हैं। आबिदा बीते तीन सालों में 25 मैच खेल चुकी है। लेकिन प्रैक्टिस करने के बाद मैदान से बाहर आने पर उसकी जिंदगी बदल जाती है। वह मैदान में कुछ और होती है और बाहर कुछ और। इसके पीछे की वजह तमीम बताती हैं। वह कहती हैं कि आबिदा के परिवार को उसका फुटबॉल खेलना पसंद नहीं है। लेकिन ऐसी ही रूढ़िवादी परिवार से आने वाली लड़कियों के लिए तमीम ने फुटबॉल सिखाने का फैसला किया।

मैदान पर आपको हिजाब और फुल पैंट्स में फुटबॉल खेलती लड़कियां दिख जाएंगी। तमीम बताती हैं कि इस ड्रेस में फुटबॉल खेलने पर इन लड़कियों के खेल पर कोई असर नहीं पड़ता। तमीम मुस्लिम महिला एसोसिएशन स्कूल की पीटी टीचर भी हैं। वह खुद ही लड़कियों का ख्याल ध्यान रखती हैं और प्रैक्टिस के बाद सूरज ढलने से पहले लड़कियों को सुरक्षित घर पहुंचाती हैं।

आबिदा के चाचा इमाम हैं और उन्हें व आबिदा के पूरे परिवार को समझाने में तमीम को काफी वक्त लग गया। उन्होंने समझाया कि आबिदा एक अच्छी खिलाड़ी है और वह आगे जाकर अच्छा कर सकती है।

तमीम 1990 में चेन्नई के चेंगलपेट में पढ़ाई कर रही थीं तब उनका परिचय फुटबॉल से हुआ था। सिर्फ दो सालों के भीतर ही उन्होंने स्टेट लेवल मैच खेला था और कांचीपुरम में मैच भी जितवाया था। अपने दिनों में तमीम ने कई स्टेट लेवल के मैच खेले और 1999 में ऊटी में हुए एक मैच में उन्होंने ऐसा प्रदर्शन किया कि उन्हें अखबारों ने ‘लेडी बाइचुंग भूटिया’ का उपाधि दे दी।

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